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लाल किले से सहकारिता का जागरण : सहकार भारती ने प्रधानमंत्री मोदी के विचारोंका किया स्वागत

75 वे स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मा. प्रधानमंत्री श्री. नरेंद्र मोदीजी ने सहकारीता को अपने देशकी सांस्कृतिक धरोहर कह कर रेखांकीत करना, सहकारीता के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है।

PM Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त स्वतन्त्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा की, अर्थजगत में पूंजीवाद और समाजवाद इसकी चर्चा तो बहुत होती है, लेकिन भारत सहकारवाद पर भी बल देता है। सहकारवाद, हमारी परम्‍परा, हमारे संस्‍कारों के भी अनुकूल है। सहकारवाद, जिसमें जनता-जनार्दन की सामूहिक शक्ति अर्थव्‍यवस्‍था की चालक शक्ति के रूप में प्रेरक शक्ति बने, ये देश के जमीनी स्तर की अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम क्षेत्र है। सहकार जगत, ये सिर्फ कानून-नियमों के जंजाल वाली एक व्‍यवस्‍था नहीं है, बल्कि सहकारिता एक spirit है, सहकारिता एक संस्‍कार है, सहकारिता एक सामूहिक चलने की मन:प्रवृत्ति है। उनका सशक्तिकरण हो, इसके लिए हमने अलग मंत्रालय बनाकर इस दिशा में कदम उठाए हैं और राज्‍यों के अंदर जो सहकारी क्षेत्र है, उसको जितना ज्‍यादा बल दे सकें, वो बल देने के लिए हमने ये कदम उठाया है।

सहकार भारती के राष्ट्रीय महामंत्री डा उदय जोशी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है की सहकार भारती मानती चली आ रही है की सहकारीता देशके दलित, दुर्बल, असंघटीत, निर्धन, तथा पिछडे समाज वर्ग के स्थाई आर्थिक विकास का निःसंदेह एक सशक्त साधन है। सहकार भारती मा. प्रधानमंत्री जी के इन विचारोंका स्वागत और अभिनंदन करती है। सहकारीता को व्यावसायिक सुलभता बहाल करनेकी अपेक्षा भी व्यक्त करती है।

सहकारीता का विकास करने की बातोंसे, सहकार भारती के प्रेरणा पुरुष श्रद्धेय लक्ष्मणराव इनामदारजी को वाकई भावभीनी श्रद्धांजलि होंगी।

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