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मध्य प्रदेश में सहकारिता आंदोलन : नई ऊर्जा, नई शक्ति और नए क्षितिज” विषय पर कार्यशाला का आयोजन

नई ऊर्जा, नई शक्ति और नए क्षितिज” विषय पर आयोजित कार्यशाला का वल्लभ भवन मंत्रिमंडल कक्ष में आयोजन भोपाल में  हुआ। इस कार्यशाला में उपस्थित मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सहकारिता हमारे संस्कारों एवं संस्कृति में है। हम “सर्वे भवन्तु सुखिन:” तथा “वसुधैव कुटंबकम्” के मार्ग पर चलते हैं। सबके लाभ, सबके कल्याण और सबकी भलाई की सोच ही सहकारिता है।
सहकारिता भगवान की तरह ही सर्वव्यापी है तथा सबका कल्याण करती है। विशेष रूप से छोटे लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी है। उनके पास बुद्धि, दक्षता, क्षमता तो है पर आर्थिक और अन्य संसाधन नहीं हैं। सहकारिता उन्हें ये सब प्रदान करती है। प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में सहकारिता के माध्यम से अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित किए जाएंगे।
कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों के सहकारिता विशेषज्ञ, सहकारिता मंत्री श्री अरविंद सिंह भदौरिया, सांसद श्री रमाकांत भार्गव, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस , श्री सतीश मराठे RBI निर्देशक, संजय पाचपोर राष्ट्रीय संगठन मंत्री, श्री अशोक टेकाम, श्री सुभाष मांडगे, श्री विवेक चतुर्वेदी, अमूल के श्री सोढ़ी, इंडियन कॉफी हाऊस के एंटोनी, कॅमको के अध्यक्ष किशोर कुमार,आदि उपस्थित थे।
प्रदेश में सहकारिता के माध्यम से अर्थ-व्यवस्था का नवनिर्माण किया जाएगा। पर्यटन, डेयरी, पशुपालन, मत्स्य-पालन आदि विभिन्न क्षेत्रों में सहकारिता को मजबूत बनाया जाएगा। प्रदेश में सहकारिता ‘ग्रोथ का इंजन’ बनेगी। प्रदेश में सहकारिता के माध्यम से फूड प्रोसेसिंग को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाएगा।
आर.बी.आई सेंट्रल बोर्ड के निदेशक श्री सतीश मराठे ने कहा कि आज सहकारिता क्षेत्र में पूंजी की आवश्यकता है। इसके लिए मौजूदा कानूनों में आवश्यक संशोधन करते हुए सहकारी संस्थाओं को अधिक अधिकार संपन्न बनाना आवश्यक है। उन्होंने सहकारिता को सुदृढ़ करने के लिए बेहतर वातावरण निर्माण की आवश्यकता बताई। किसानों की आय दोगुना करने में डेयरी क्षेत्र महत्वपूर्ण है। इससे उनकी आय में अच्छी वृद्धि हो सकती है। मध्यप्रदेश में एनिमल सीड बनाने तथा खाद्य प्र-संस्करण की बड़ी संभावनाएँ हैं। प्रदेश में तिलहन और दलहन का उत्पादन बढ़ाया जाना चाहिए।
पर्यटन के क्षेत्र में सहकारिता के माध्यम से आय की अच्छी संभावनाएँ हैं।
कैम्पो के अध्यक्ष श्री किशोर कुमार ने कहा कि सहकारिता फसलों के बाजार मूल्य गिरने पर भी उन्हें सपोर्ट प्रदान करती है। कर्नाटक राज्य में जब लहसुन के दाम गिरे तो सहकारी समितियों ने बड़ी मात्रा में अच्छे मूल्य पर लहसुन खरीदकर किसानों की सहायता की। यह सहकारिता की शक्ति है।
अमूल के क्षेत्रीय निदेशक श्री आर.एस. सोडी ने कहा कि सहकारिता उन छोटे-छोटे कार्य करने वाले व्यवसाइयों और कामगारों के लिए है, जो अकेले कुछ नहीं कर सकते। वे साथ मिलकर बहुत अच्छा कार्य कर सकते हैं। सहकारिता के क्षेत्र को लाभदायक बनाने के लिए इसमें पेशेवर लोगों की सहायता लेनी होगी। आधुनिक तकनीकी का भी उपयोग आवश्यक है। मार्केटिंग और ब्रान्डिंग पर भी ध्यान देना होगा।
सहकारिता विशेषज्ञ श्री के.के. त्रिपाठी ने कहा कि किसानों को सहकारिता का प्रशिक्षण देकर उनके कृषक उत्पादन संगठन बनाए जा सकते हैं। स्व-सहायता समूहों एवं किसानों की सहकारी समितियों को कृषि उत्पाद प्र-संस्करण के लिए प्रोत्साहित किया जाए। सहकारिता के क्षेत्र में मानव संसाधन नीति भी बनानी होगी। प्रदेश में कोल्ड चेन, भंडारण को भी बढ़ावा देना होगा।
सहकारिता विशेषज्ञ श्री सुभाष मांडगे ने कहा कि मध्यप्रदेश डेयरी क्षेत्र में बहुत पीछे था परंतु मुख्यमंत्री श्री चौहान के नेतृत्व में महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से इस क्षेत्र में अच्छी प्रगति हुई है। आज दुग्ध उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में चौथे स्थान पर है।
इंडियन कॉफी वर्कर्स कॉ-ऑपरेटिव सोसाइटी (इंडियन कॉफी हाउस) के श्री एंटोनी ने कहा कि हमारी सहकारी संस्था का मुख्य उद्देश्य अधिकतम रोजगार देना है। मध्यप्रदेश में अभी हमारी 36 ब्रांच हैं। अब छोटे-छोटे शहरों में भी कॉफी हाउस खोले जा रहे हैं।
सांसद एवं सहकारिता विशेषज्ञ श्री रमाकांत भार्गव ने कहा कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा किसानों को 0% ब्याज पर कृषि ऋण दिया जाता है तथा ब्याज की राशि सरकार भरती है। यह कृषि एवं सहकारिता के क्षेत्र में बड़ा कदम है। पूरे प्रदेश में डेयरी एवं मत्स्य-पालन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
संजय पाचपोर ने कहा की सहकारी समितियों का निर्वाचन शीघ्र हो, दैनंदिन कार्य मे अधिकारियों का हस्तक्षेप कम हो, सहकारी समितियों के गठन प्रक्रिया सरल हो, सहकारिता विभाग में कर्मचारी कमी को पूरा किया जाए, PACS का आधुनिकी करण हो, सरकार सहकारिता के क्षेत्र में शोध करने के लिये शोध छात्रों को अवसर प्रदान करे।
सहकारिता विशेषज्ञ प्रो. शशिका रवि ने कहा कि मध्यप्रदेश में स्व-रोजगार के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता है। कृषि तकनीकी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। फसलों की प्रोसेसिंग भी की जाए।
सहकार भारती के प्रदेश अध्यक्ष श्री विवेक चतुर्वेदी ने सहकारिता की परिभाषा बताते हुए कहा कि जब धन, श्रम एवं बुद्धि तीनों शक्तियाँ एक साथ लगती हैं तो इसका लाभ सभी में बँटता है, वही सहकारिता है। मध्यप्रदेश में श्रमिक सहकारी समितियों का गठन किया जाना चाहिए।
प्रारंभ में मध्यप्रदेश राज्य योजना एवं नीति आयोग के उपाध्यक्ष प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।

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